कानपुर देहात की भोगनीपुर विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. कैबिनेट मंत्री राकेश सचान एक बार फिर जीत का दावा कर रहे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के नेता नरेंद्र पाल भी सीट जीतने का भरोसा जता रहे हैं. जातीय समीकरण और पिछले चुनावों के नतीजे इस सीट को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं.
कानपुर देहात की भोगनीपुर विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. कैबिनेट मंत्री राकेश सचान एक बार फिर जीत का दावा कर रहे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के नेता नरेंद्र पाल भी सीट जीतने का भरोसा जता रहे हैं. जातीय समीकरण और पिछले चुनावों के नतीजे इस सीट को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले की भोगनीपुर विधानसभा सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है. यहां पिछले कुछ चुनावों से सपा, बसपा और भाजपा के बीच सत्ता का लगातार बदलता समीकरण देखने को मिला है. फिलहाल यह सीट लगातार दो चुनावों से भाजपा के कब्जे में है और मौजूदा विधायक और प्रदेश सरकार में एमएसएमई मंत्री राकेश सचान 2027 में भी जीत दोहराने की उम्मीद जता रहे हैं. वहीं समाजवादी पार्टी भी इस सीट को अपने पक्ष में लाने के लिए पूरी ताकत लगाने की बात कर रही है.
भोगनीपुर सीट का चुनावी इतिहास
कानपुर देहात की भोगनीपुर विधानसभा सीट का इतिहास बताता है कि यहां मतदाता समय-समय पर अलग-अलग दलों को मौका देते रहे हैं. कभी यह सीट समाजवादी पार्टी के पास रही तो कभी बहुजन समाज पार्टी के पास और अब भाजपा ने यहां लगातार दो चुनावों में जीत दर्ज की है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राकेश सचान ने जीत हासिल की और बाद में उन्हें प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाकर एमएसएमई विभाग की जिम्मेदारी दी गई. इससे पहले 2017 में भाजपा के विनोद कुमार कटिहार इस सीट से विधायक चुने गए थे.
अगर इससे पहले के चुनावों पर नजर डालें तो 2012 में समाजवादी पार्टी के योगेंद्र पाल सिंह ने यहां जीत दर्ज की थी. 2007 में बसपा के रघुनाथ प्रसाद विधायक बने थे, जबकि 2002 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के अरुण कुमार कोरी ने इस सीट पर जीत हासिल की थी. इस तरह भोगनीपुर सीट पर समय-समय पर अलग-अलग दलों का दबदबा रहा है.
राकेश सचान ने जनता पर जताया भरोसा
भोगनीपुर से विधायक बनने के बाद और सरकार में मंत्री बनने के बाद राकेश सचान को भरोसा है कि क्षेत्र में लोगों से लगातार संपर्क और विकास कार्य 2027 के चुनाव में उनके लिए फायदेमंद साबित होंगे. उनका कहना है कि वे लगातार अपने मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहते हैं. चुनाव जीतने के बाद से ही हर शनिवार को क्षेत्र में जनता दरबार लगाया जाता है. इस जनता दरबार में इलाके के लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं और उन्हें सीधे मंत्री तक पहुंचाते हैं.
इस दौरान एसडीएम तहसील और पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहते हैं, जिससे शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया जा सके. राकेश सचान का यह भी कहना है कि उन्होंने प्रदेश सरकार से बड़ा बजट लाकर भोगनीपुर क्षेत्र में विकास कार्यों पर खर्च कराने की कोशिश की है और यही काम आने वाले चुनाव में उनकी ताकत बनेगा.
सपा नेता नरेंद्र पाल भी कर रहे जीत का दावा
भोगनीपुर सीट पर समाजवादी पार्टी की ओर से मंत्री राकेश सचान को चुनौती देने वाले नरेंद्र पाल भी 2027 के चुनाव को लेकर काफी आश्वस्त नजर आते हैं. उनका कहना है कि वे पहले भी इस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं और पिछली बार बहुत कम मतों से चुनाव हार गए थे. नरेंद्र पाल के मुताबिक ललितपुर से लेकर लखनऊ तक करीब 40
विधानसभा सीटों में सबसे कम मतों से हारने वालों में उनका नाम भी शामिल था. उनका कहना है कि अगर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हैं, तो वे सभी वर्गों और जाति-धर्म के लोगों को साथ लेकर यह सीट पार्टी को जिताकर देंगे.
वे यह भी दावा करते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह से समाजवादी पार्टी को बड़ी जीत मिली और करीब 31-32 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज हुई, उससे साफ है कि जनता का भरोसा पार्टी और अखिलेश यादव पर बना हुआ है. इसी समर्थन को आगे भी बनाए रखने की कोशिश की जाएगी.
क्या कहते हैं जातीय समीकरण?
भोगनीपुर विधानसभा सीट पर चुनावी परिणामों को प्रभावित करने में जातीय समीकरण भी अहम भूमिका निभाते हैं. अनुमान के मुताबिक इस सीट पर दलित मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है, करीब 85 हजार बताई जाती है. इसके अलावा ब्राह्मण मतदाता लगभग 38 हजार, मुस्लिम करीब 35 हजार, कुशवाहा करीब 28 हजार, यादव करीब 25 हजार और क्षत्रिय मतदाता लगभग 22 हजार हैं. वहीं पाल समुदाय के मतदाताओं की संख्या करीब 3 हजार बताई जाती है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य वर्गों के बीच होने वाला ध्रुवीकरण भाजपा को फायदा पहुंचाता है. वहीं दलित वोट किस ओर शिफ्ट होता है और पाल मतदाता किस पार्टी का साथ देते हैं, यह भी चुनावी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाता है.
स्थानीय पत्रकारों की राय
भोगनीपुर के राजनीतिक माहौल को लेकर स्थानीय पत्रकारों की राय भी अलग-अलग है. कुछ पत्रकारों का मानना है कि यहां अभी भी भाजपा की स्थिति मजबूत है और अगर पार्टी दोबारा मंत्री राकेश सचान को टिकट देती है तो चुनाव में उन्हें फायदा मिल सकता है. हालांकि कुछ पत्रकारों का यह भी कहना है कि यह सीट यादव-बहुल क्षेत्र मानी जाती है और पिछले चुनाव में भी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को अच्छा खासा समर्थन मिला था. उनके मुताबिक उस समय राकेश
सचान का नाम और नई उम्मीदवारी भाजपा के पक्ष में गई थी जससे पार्टी को फायदा मिला.
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि 2027 के चुनाव में बहुत कुछ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि दोनों दल किसे उम्मीदवार बनाते हैं. फिलहाल स्थिति यही है कि भोगनीपुर में मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच ही देखने को मिलेगा.
2027 में फिर हो सकता है कड़ा मुकाबला
भोगनीपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास बताता है कि यहां चुनाव हमेशा दिलचस्प और कड़े मुकाबले वाले रहे हैं. भाजपा जहां विकास और संगठन के दम पर जीत बरकरार रखने की कोशिश करेगी वहीं समजवादी पार्टी पिछली हार के कम अंतर और जातीय समीकरण के सहारे वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है. ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव इस सीट पर एक बार फिर भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर बन सकता है.
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