अब्दुल्ला आजम के दो पैनकार्ड मामले में निर्णायक मोड़, सेशन कोर्ट में सजा पर सरकार और बचाव पक्ष की जोरदार बहस

रामपुर की सेशन कोर्ट में समाजवादी पार्टी के नेता अब्दुल्ला आजम के चर्चित दो पैनकार्ड मामले में सुनवाई ने निर्णायक मोड़ ले लिया है। यह सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा सुनाई गई सात-सात साल की सजा और पचास-पचास हजार रुपये के जुर्माने के खिलाफ दायर अपील पर हो रही हैअदालत कक्ष में सरकार और बचाव पक्ष के बीच तीखी और विस्तृत कानूनी बहस चल रही है, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के जरिए न्यायालय को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से अहम है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी प्रदेश में व्यापक चर्चा का विषय

बना हुआ है।निचली अदालत के फैसले को सही ठहराने की कोशिश

सरकार की ओर से पेश हुई एडीजीसी सीमा राणा ने अदालत के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि एमपी-एमएलए कोर्ट का फैसला पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि मामले में सभी सबूतों और गवाहों का समुचित मूल्यांकन किया गया था, जिसके बाद सजा सुनाई गई।एडीजीसी ने अदालत से अनुरोध किया कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा जाए, ताकि कानून का पालन सुनिश्चित हो सके और न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास बना रहे।

सजा में राहत की मांग
दूसरी ओर, बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर सुल्तान और जुबेर सहित अन्य वकील अदालत में सक्रिय रूप से बहस कर रहे हैं। उन्होंने अपने तर्कों में यह रेखांकित किया कि सजा के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना चाहिएएडीजीसी ने अदालत से अनुरोध किया कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा जाए, ताकि कानून का पालन सुनिश्चित हो सके और न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास बना रहे।

सजा में राहत की मांग

दूसरी ओर, बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर सुल्तान और जुबेर सहित अन्य वकील अदालत में सक्रिय रूप से बहस कर रहे हैं। उन्होंने अपने तर्कों में यह रेखांकित किया कि सजा के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना चाहिएबचाव पक्ष का कहना है कि मामले में तथ्यों की व्याख्या और कानूनी पहलुओं पर गहराई से समीक्षा आवश्यक है। वे अदालत से अपील कर रहे हैं कि सजा में राहत दी जाए या मामले को नए सिरे से परखा जाए, ताकि न्याय के सभी पहलुओं पर संतुलित निर्णय हो सके।

पिछली सुनवाई और तय तारीखों का क्रम

इससे पहले 12 जनवरी 2026 को सरकार ने इस अपील पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई थी, जिस पर आंशिक बहस हुई थी। इसके बाद अदालत ने अगली तारीख 21 जनवरी 2026 तय की थी, जहां दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्कों को आगे बढ़ाया।लगातार चल रही सुनवाई के बाद आज की तारीख निर्धारित की गई थी, जिसे इस मामले के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हर सुनवाई के साथ बहस और गहराती जा रही है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि अदालत किसी ठोस निष्कर्ष की ओर बढ़ रही है।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

आज की सुनवाई में भी दोनों पक्षों के अधिवक्ता अदालत में मौजूद हैं और बहस जारी है। यह मामला केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। रामपुर से लेकर लखनऊ तकराजनीतिक हलकों की निगाहें सेशन कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं। आजम खान और अब्दुल्ला आजम के लिए यह फैसला भविष्य की राजनीति और कानूनी राह दोनों को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है।

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