राजकुमार बना 3 बच्चों की जिंदगी का सहारा।
सुल्तानपुर के कलेक्ट्रेट सभागार में जब नन्हे ‘हीरो’ राजकुमार निषाद को ‘बाल वीरता पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया, तो हर आंख गर्व और भावनाओं से भर उठी। जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह और पुलिस अधीक्षक चारू निगम ने उसे प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
उस दिन गोमती नदी किनारे 13 वर्षीय राजकुमार अपनी भैंस चरा रहा था। तभी उसने देखा कि नदी में नहा रहे 4 लोग अचानक गहरे पानी में डूबने लगे। चीख-पुकार सुनते ही राजकुमार बिना अपनी जान की परवाह किए नदी में कूद पड़ा।
तेज धारा और मौत के डर के बीच इस मासूम ने एक-एक कर 3 किशोरों को बाहर निकाल लिया। लेकिन 23 वर्षीय कुलदीप को बचाने की हर कोशिश नाकाम रही। भारी शरीर और तेज बहाव के आगे राजकुमार की छोटी उम्र हार गई, और कुलदीप की जिंदगी नहीं बच सकी।
गांव के लोग आज भी कहते हैं— अगर उस दिन राजकुमार हिम्मत न दिखाता, तो शायद 3 और घरों के चिराग बुझ जाते।
इस बहादुरी ने न सिर्फ 3 परिवारों की खुशियां बचाईं, बल्कि पूरे जिले को एक नया ‘बाल वीर’ दे दिया।
सम्मान समारोह में अधिकारियों ने राजकुमार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं राहुल शुक्ला ने पीड़ित परिवार से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की और राजकुमार के परिवार को आर्थिक सहायता देने के साथ बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की घोषणा भी
पत्रकार आमिर महफूज खान
केजीएन एक्सप्रेस न्यूज़
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