हरदोई के एक स्कूल में,
एक मां अपने बच्चे के हक के लिए खड़ी थी…
उम्मीद थी कि स्कूल सुनेगा, समझेगा, साथ देगा…
लेकिन सामने से मिला गुस्सा, ऊंची आवाज़ और ‘शट अप’ जैसे शब्द।
एक तरफ मां थी—अपने बच्चे की पढ़ाई और हक के लिए सवाल पूछती हुई…
दूसरी तरफ थीं प्रिंसिपल—गुस्से में भरी हुईं,
जो बार-बार कह रही थीं—
“नाम काट दो… हमें नहीं रखना बच्चा… ले जाओ इसे यहां से।”
आरोप लगे कि स्कूल से ही किताबें और कॉपियां खरीदने का दबाव बनाया जा रहा था।
जब मां ने इस पर आपत्ति जताई,
तो बात समझाने की जगह विवाद में बदल गई…
और वही पल कैमरे में कैद होकर सोशल मीडिया पर फैल गया।
वीडियो वायरल हुआ—
लोगों ने सवाल उठाए, नाराज़गी जताई,
और प्रशासन तक मामला पहुंच गया।
जांच के आदेश दिए गए…
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
कुछ समय बाद वही प्रिंसिपल सामने आईं,
इस बार गुस्से में नहीं… बल्कि नरम आवाज़ में।
उन्होंने कहा—
“मैं माफी मांगती हूं… आगे से ऐसा नहीं होगा।
मैं उस वक्त बहुत गुस्से में थी, इसलिए मेरे मुंह से ऐसे शब्द निकल गए।”
एक माफी…
जो शायद हालात को शांत कर दे,
लेकिन उस पल को नहीं मिटा सकती
जब एक बच्चे के सामने उसकी मां का अपमान हुआ था।
अब सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं है—
बल्कि उस भरोसे का है,
जो माता-पिता स्कूल पर करते हैं।
क्या एक ‘सॉरी’ उस भरोसे को फिर से जोड़ पाएगा?
या ये घटना एक याद बनकर रह जाएगी—
जहां शिक्षा के मंदिर में, सम्मान कहीं खो गया था…
#पत्रकार आमिर महफूज खान
#केजीएन एक्सप्रेस न्यूज़
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